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नेत्र सहायक के खाली पदो को जल्द नियुक्त करने की मांग

Prakash Choudhary 19 May 2020 10:19 AM State 63584

पैरामेडिकल स्टूडेंट्स वेलफेयर यूनियन की ओर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ज्ञापन भेजकर चिकित्सा विभाग में खाली पड़े नेत्र सहायक के पदों को जल्द नियुक्त करने की मांग की है।
राजस्थान ओफ्थलमिक एसोसिएशन एवं बेरोजगार नेत्र सहायक संगठन द्वारा मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत एवं चिकित्सा मंत्री श्री रघु शर्मा को नेत्र सहायको की नियुक्ति के लिए ज्ञापन दिया गया।
अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा है कि आज प्रदेश में लगभग 450 नेत्र सहायक दर दर की ठोकरें खाने के लिए मजबुर है किसका राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम पर काफी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
साथ में राठौड़ ने कहा है कि प्रदेश में सभी पीएचसी, सीएचसी व जिला अस्पतालो में नेत्र सहायक के पद सृजित कर सभी बेरोजगार नेत्र सहायको को जल्द नियुक्त किया जाए।

डॉ सम्पूर्णानंद आयुर्विज्ञान महाविद्यालय(जोधपुर) के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी को लिखा गया पत्र।

माननीय मुख्यमंत्री महोदय,
राजस्थान सरकार, जयपुर

विषय- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में नेत्र सहायको का स्टाफिंग पैटर्न संशोधित करके नए पद सृजित करते हुए विज्ञप्ति जारी करने बाबत।

महोदय,
उपरोक्त विषय अंतर्गत निवेदन है कि राज्य में वर्तमान में मात्र 295 नेत्र सहायक राज्य सेवा में कार्यरत हैं। जो कि राज्य की सात करोड़ जनता को नेत्र सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बहुत कम है। अस्पतालों में नेत्र सहायकों के पद आवश्यकता से कम होने के कारण नेत्र रोगियों की समस्त जांचे सुचारू रूप से नहीं हो पाती है। वर्तमान में मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर, लैपटॉप इत्यादि के ज्यादा उपयोग में लेने के कारण नेत्र रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इन सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के ज्यादा उपयोग करने के कारण लगभग 40% स्कूल विद्यार्थियों को चश्मा लगाना पड़ रहा है।

जैसा की सबको विदित है। वर्तमान में पूरा विश्व कोरोना संक्रमण की महामारी से गुजर रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने भी यह माना है कि कोरोना वायरस आंखों के माध्यम से भी एक दूसरे में फैल रहा है। आंखों में होने वाली एक बीमारी कंजेक्टिवाइटिस के द्वारा बढ़ रहा है। ऐसी परिस्थिति में सभी नेत्र रोगियों का गहन परीक्षण आवश्यक हो गया है। इसी क्रम में राज्य के अस्पतालों में कार्यरत समस्त नेत्र सहायक कंधे से कंधा मिलाकर कोरोना संक्रमण प्रबंधन में लगे हुए हैं। लेकिन राज्य के कई अस्पतालों में नेत्र सहायकों के पद नहीं होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोगियों की नेत्र से संबंधित जांचे नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर राज्य में लगभग 500-600 प्रशिक्षित बेरोजगार नेत्र सहायक नियुक्ति के लिए भटक रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि नेत्र सहायकों के नए पद सृजित करके इन बेरोजगार नेत्र सहायकों को नियुक्ति दे दी जाए तो कोरोना संक्रमण प्रबंधन करने में जनता को और भी राहत मिल सकेगी।

एक पहलू यह भी है कि लैब टेक्नीशियन, रेडियोग्राफर एवं नेत्र सहायक तीनों ही पैरामेडिकल कैडर में आते हैं। तीनों की शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता समान है। रेडियोग्राफर एवं लैब टेक्नीशियन के पद सभी अस्पतालों में पीएचसी स्तर तक सृजित हैं। लेकिन नेत्र सहायको के पद सभी स्तर पर सृजित नहीं होने के कारण नेत्र रोगियों को नेत्र की प्राथमिक जांच हेतु भी जिला अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। वर्तमान में नेत्र सहायकों के लिए स्टाफिंग पैटर्न 50 बेड की सीएचसी पर एक पद एवं 300 बेड के अस्पताल में दो पद हैं। जबकि नेत्र रोगियों की संख्या को देखते हुए यह बहुत कम है। इस क्रम में संगठन का आपसे विनम्र अनुरोध है कि राज्य के सभी अस्पतालों में नेत्र सहायको के लिए स्टाफिंग पैटर्न को संशोधित करके नए पद सृजित कर विज्ञप्ति जारी कर बेरोजगार नेत्र सहायकों को नियुक्ति देने की कृपा करें।

सधन्यवाद

यशवेंद्र सिंह राठौड़
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष (पैरामेडिकल)
डॉ सम्पूर्णानंद आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, जोधपुर

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