मुसलमानों के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण देने वाले यति नरसिंहानंद अब तक जेल में क्यों नहीं?

jayhind-admin 07 January 2022 11:26 AM Dharma 35421

इस्लाम को धरती से मिटा देना चाहिए… सभी मुसलमानों को ख़त्म कर देना चाहिए.”

“आज हम जिन्हें मुसलमान बुलाते हैं, उन्हें पूर्व में राक्षस बुलाया जाता था.”

Islam is an organised gang of criminals. और जिसका आधार औरतों का व्यापार है. जिसका आधार औरतों को बर्बाद करना है. काफ़िर की औरतों को छीनना ये सबसे बड़ा आधार है.

ये भड़काऊ बयान यति नरसिंहानंद सरस्वती के हैं. ग़ाज़ियाबाद ज़िले के डासना क़स्बे में देवी मंदिर के ‘पीठाधीश’ यति नरसिंहानंद सरस्वती अब जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर भी हैं

ये वही देवी मंदिर है, जिसके गेट के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है- यहाँ मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश में जहाँ ट्वीट करने पर, रिपोर्टिंग करने पर या फिर सीएए के ख़िलाफ़ पोस्टर लगाने पर भी ग़िरफ़्तारी हुई है. सवाल उठ रहे हैं कि मुसलमानों के ख़िलाफ़ लगातार नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने वाले यति नरसिंहानंद सरस्वती अभी भी जेल में क्यों नहीं हैं?

हिंदुत्ववादी नेताओं की लंबी होती कतार में यति नरसिंहानंद सरस्वती सबसे चर्चित पोस्टरब्वॉय हैं.

मुसलमानों के ख़िलाफ़ उनके भड़काऊ बयान पिछले कई सालों से लोगों तक पहुँच रहे हैं.

जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर बने नरसिंहानंद पर आरोप ये भी है कि वो डासना देवी मंदिर और उसकी ज़मीन को अपनी निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.

मुस्लिम-बहुल डासना में कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि यति नरसिंहानंद के भाषणों पर वहाँ कोई ध्यान नहीं देता, लेकिन ग़ाज़ियाबाद पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक़ इन भाषणों से हिंदू और मुसलमानों में ध्रुवीकरण बढ़ा है.

ऐसे वक़्त में जब उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण चुनाव नज़दीक हैं और कई हलकों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण साफ़ देखा जा रहा है, ग़ाज़ियाबाद के इस क़स्बे में जो हो रहा है, उसका असर ज़िले की सीमाओं से दूर पूरे उत्तर प्रदेश में भी महसूस किया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश दौरे पर मुझसे कई मुसलमानों ने नरसिंहानंद सरस्वती की ‘ज़हरीली भाषा’ पर चिंता जताई. लेकिन योगी राज में वो रोके नहीं रुक रहे हैं. आख़िर क्यों?

हाल ही में हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में यति नरसिंहानंद ने कहा, “…. मुसलमानों को मारने के लिए तलवार की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि तलवार से आपसे वो मरेंगे भी नहीं. आपको टेकनीक में उनसे आगे जाना होगा.”

इस धर्म संसद में खुलेआम मुसलमानों के नरसंहार की बात करने का आरोप है. सोशल मीडिया पर मचे कोहराम के बाद उत्तराखंड पुलिस ने धर्म संसद में दिए गए हेट स्पीच मामले में एफ़आईआर दर्ज की और जाँच शुरू हो गई है.

एफ़आईआर में यति नरसिंहानंद का नाम बाद में जोड़ दिया गया है. हालाँकि पुलिस ने ये स्पष्ट नहीं किया है कि पहले उनका नाम इस एफ़आईआर में क्यों नहीं जोड़ा गया था.

कौन-कौन से मामले हैं यति नरसिंहानंद के ख़िलाफ़

यति नरसिंहानंद पर एफ़आईआर, मुक़दमों की तो पहले ही कमी नहीं थी.

उनकी वकील और डासना देवी मंदिर की महंत माँ चेतनानंद सरस्वती के मुताबिक़ यति पर क़रीब दो दर्जन मामले अलग-अलग चरणों में हैं, कुछ में चार्जशीट दाखिल है, कुछ मामलों में हाईकोर्ट ने स्टे लगाया हुआ है और कुछ मामलों में जाँच चल रही है.

उत्तराखंड में यति नरसिंहानंद पर दो धाराओं 153-ए और 295-ए के अंतर्गत मामला चलेगा. 153-ए यानी समुदायों के बीच धर्म, भाषा आदि के आधार पर दुश्मनी फैलाना, और धारा 295-ए यानी धार्मिक भावनाओं को आहत करना या उसकी कोशिश करना.

ग़ाज़ियाबाद पुलिस ने जिन 10 मामलों की जानकारी मुहैया करवाई है, उसके मुताबिक़ यति नरसिंहानंद के ख़िलाफ़ आईटी एक्ट के अलावा आईपीसी धाराओं जैसे 306, 307, 395 आदि में मुक़दमे दर्ज हैं.

धारा 306 यानी किसी को आत्महत्या के लिए उकसाना. धारा 307 यानी हत्या का प्रयास. 395 यानी डकैती.

हमने ग़ाज़ियाबाद पुलिस से मिली जानकारी को वरिष्ठ वकील राजेश त्यागी के साथ साझा किया और पूछा कि यति नरसिंहानंद सरस्वती के भाषणों और अन्य मामलों में पुलिस की लगाई गई धाराओं पर वो क्या कहेंगे.

राजेश त्यागी उन 76 वकीलों में से हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर उनका ध्यान हरिद्वार में हेट स्पीच मामले की ओर खींचा है.

राजेश त्यागी उन 76 वकीलों में से हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर उनका ध्यान हरिद्वार में हेट स्पीच मामले की ओर खींचा है.

मेरठ के रहने वाले राजेश त्यागी ने बताया कि वो लगातार उनके वीडियो देख रहे थे और जिस तरह की भाषा का नरसिंहानंद इस्तेमाल कर रहे हैं, “पुलिस तो उन्हें एक तरह की छूट दे रही है.”

वे कहते हैं, “उन पर डकैती, हत्या की कोशिश जैसी धाराएँ लगाई गई हैं. मुझे समझ नहीं आता इन सब मामलों में, जिनमें इन्होंने अपराधों को दोहराया है, उनके अंदर इनको ज़मानत कैसे मिल रही है. इनकी तो ज़मानत रद्द हो जानी चाहिए थी.”

“इन्हें सीधे-सीधे सत्ता का संरक्षण हासिल है. उनको पुलिस कुछ नहीं कह रही है, प्रशासन कुछ नहीं कह रहा है. बस मुक़दमा दर्ज किया और छोड़ दिया. तो ये लोग निश्चिंत हैं.”

राजेश त्यागी कहते हैं कि जिस तरह का ज़हर बोया जा रहा है, उससे ख़तरा ये है कि बहुत बड़े पैमाने पर क़त्लेआम हो सकता है.

वो कहते हैं, “ये मामला सीधा-सीधा (UAPA) यूएपीए का बनता है लेकिन पुलिस यूएपीए नहीं लगा रही है. हरिद्वार मामले में यूएपीए नहीं लगाया है, जो सीधे-सीधे यूएपीए का मामला है. आपके पास दस्तावेज़ हैं, डिज़िटिल, वीडियो सबूत हैं.”

ग़ाज़ियाबाद के एसएसपी पवन कुमार ने बीबीसी से बातचीत में यति नरसिंहानंद सरस्वती के ख़िलाफ़ कार्रवाई में किसी भी राजनीतिक दबाव से इनकार किया.

उत्तराखंड में गढ़वाल के डीआईजी करण सिंह नागन्याल ने भी बीबीसी से बातचीत में कहा है कि पुलिस पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं है और वो यति नरसिंहानंद पर ‘सॉफ़्ट’ नहीं है.

करण सिंह नागन्याल ने यही नहीं बताया कि मामले में गठित एसआईटी की रिपोर्ट कब तक आएगी लेकिन कहा कि “जितनी जल्दी हो सकेगा सबूत इकट्ठा करके आख़िरी चार्जशीट भेजेंगे.”

देवी मंदिर के प्रांगण में स्थित एक हॉल में बीबीसी से बातचीत में यति नरसिंहानंद सरस्वती के नज़दीकी और ‘छोटा नरसिंहानंद’ कहे जाने वाले अनिल यादव ने मुस्कुराते हुए कहा, “मुक़दमों की लाइन लगी हुई है. कोई दिक़्क़त नहीं है. ये तो गहने हैं हमारे.”

उनका ये भी कहना था कि कार्रवाई नहीं होने के पीछे केवल एक ही कारण है कि गुरूजी ने कोई गुनाह नहीं किया है और ना ही उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत है.

ग़ाज़ियाबाद पुलिस के अनुसार यति नरसिंहानंद सरस्वती पर दर्ज 13 मुक़दमों में से आधे से ज़्यादा में चार्जशीट लगी हुई है.

पुलिस के मुताबिक़ यति पर गुंडा ऐक्ट लगाने का मामला ज़िला मजिस्ट्रेट के दफ़्तर में लंबित है. ग़ाज़ियाबाद के डीएम राकेश कुमार सिंह से फ़ोन पर संपर्क नहीं हो सका और भेजे गए संदेशों का जवाब नहीं मिला.

यानी उन पर कई मुक़दमे चल रहे हैं. साथ ही दिल्ली प्रेस क्लब और दिल्ली दंगों के दौरान नफ़रत से भरे भड़काऊ भाषणों एवं सांप्रदायिक माहौल के बिगड़ने के ख़तरों के बावजूद, उनके मुसलमान विरोधी बयान लगातार लोगों तक पहुँच पा रहे हैं.

News credit- www.bbc.com/hindi

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