बनखेड़ी जीआरएस ने दिया सामूहिक इस्तीफा सीईओ ने कहा

Harshit Sharma 21 October 2020 1:31 PM City 18674

 सीईओ ने कहा नोटिस देकर लेंगे सहमति करेंगे निलंबन की कार्रवाई

शकील नियाज़ी, बनखेड़ी। बनखेड़ी जनपद पंचायत (जीआरएस) रोजगार सहायको और मुख्य कार्यपालन अधिकारी एक बार फिर आमने सामने है।सोमवार को करीब 53 ग्राम पंचायत जीआरएस रोजगार सहायकों ने सामूहिक इस्तीफे का ज्ञापन तहसीलदार राजीव कहार को सौंपा है। इस्तीफे की प्रति सीईओ और जिला सीईओ को भी भेजी गई है। जीआरएस ने इस्तीफे का कारण शासन की मनरेगा योजना को लेकर अधिकारियों के दबाव बनाने को ठहराया है। ज्ञापन में कहा गया है मनरेगा योजना मांग आधारित है इसे लेकर जीआर एस को दोषी बना दबाव बनाया जा रहा है। वही अधिकारी मौखिक का आदेश देकर काम कराते हैं। वेतन भुगतान नहीं होने पर भी विरोध दर्ज कराया गया है।

गौरतलब हो कि जनपद पंचायत की फील्ड कर्मचारियों और कार्यपालन अधिकारी के बीच विवाद की यह कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर अधिकारी और जीआरएस के बीच लंबे समय से गतिरोध चला आ रहा है। पिछले दिनों एक हितग्राही के जीआरएस के साथ हुए अभद्र व्यवहार को लेकर भी आक्रोश है। हितग्राही के खिलाफ मामला पुलिस थाने में पहुंच चुका है। जनपद पंचायत सीईओ ओपी मुकाती ने बताया जीआरएस ने सामूहिक इस्तीफे का ज्ञापन जिला मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भेजा है उस की प्रतिलिपि उन्हें दी गई है। उन्होंने कहा मनरेगा शासन की महत्वपूर्ण योजना है कलेक्टर जिला सीओ सतत इसकी मानिटरिंग कर रहे हैं। ब्लॉक में 7 माह बाद भी मनरेगा लक्ष्य महज 21 फीसदी ही है।

कार्य पूर्ण करने जीआरएस को समय-समय पर निर्देशित किया जाता है इसके बावजूद लक्ष्य पूर्ण नहीं हो पा रहा है। वही पिपरिया ब्लॉक में मनरेगा लक्ष्य की स्थिति कहीं बेहतर है। सामूहिक इस्तीफे को लेकर सीईओ ने कहा सभी जीआरएस को व्यक्तिगत नोटिस देकर इस्तीफा दिए जाने की सहमति ली जाएगी। सहमति मिलने पर उनके निलंबन की कार्रवाई भी प्रस्तावित की जा सकती है। सीईओ ने कहा महज 1 माह का वेतन भुगतान नहीं हो पाया है वे स्वयं कोरोना संक्रमित होने के कारण होम क्वॉरेंटाइन हो गए थे। इस वजह से विलंब हुआ है वेतन भुगतान कार्यवाही शीघ्र पूर्ण की जाएगी। वेतन भुगतान विसंगति हमेशा नहीं रहती है। जीआरएस से अभद्रता करने वाले हितग्राही के खिलाफ पुलिस थाने में कार्यवाही के लिए पत्र लिखा गया है। सीईओ ने कहा इस्तीफे की कोई ठोस वजह नहीं है समन्वय बनाकर शासन की योजनाओं का लक्ष्य पूरा करना चाहिए। गौरतलब हो कि मनरेगा से योजना से स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिलता है। वे अन्य शहरों के लिए पलायन नहीं करते हैं। इस लिहाज से यह सभी का दायित्व है की ग्राम पंचायतों के गांव के मजदूरों को भी चिन्हित कर उन्हें मनरेगा योजना के तहत मजदूरी मुहैया कराई जाए।

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