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3 बार में 10वी पास करने वाले मुकेश ,आज CA बन सैकड़ो छात्रों को कर रहै motivate

Harshit Sharma 29 October 2020 2:24 PM Articles 49158

 

  • पिपरिया के सीए मुकेश राजपूत का इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में नाम दर्ज
  • भोपाल में युवा छात्र छात्रों का कर रहे कैरियर मार्गदर्शन

 

शकील नियाज़ी, पिपरिया।

कुक कर गुजरने का जज्बा मन मे हो तो कितनी भी परेशानी अजाये इंसान हर कठिनाइयों को पार कर जाता है। ऐसी ही कहानी है पिपरिया के युवक मुकेश राजपूत की.. 

पिपरिया कला मन्दिर इलाके के मुकेश राजपूत ने गरीबी और् अभावो मे अपना जीवन गुजारा लेकिन लक्ष्य बनाके शिक्षा की ओर बढे तो फ़िर पीछे नही देखा। हाल ही मे सीए मुकेश राजपूत, ने एक खास उपलब्धि हासिल की है। दरअसल, ‘इंडिया बुक आफ रिकार्ड्स’ ने सीए मुकेश राजपूत का नाम अपने स्वयं के जीवन पर एक किताब लिखने के लिए सराहना मिली, जिसका शीर्षक सी.ए. पास द रियल Q1 स्टोरी, 2015 में इंद्रा पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित किया गया है।

इस पुस्तक में इनके संघर्ष की कहानी पिपरिया कलां मंदिर पुरानी बस्ती से शुरू होती है, और उनके जीवन के उतार-चढ़ाव का वर्णन किया गया है, शून्य से लेकर शिखर तक पहुंचने का, बहुत ही रोचक तरीके से वर्णन किया, उनकी कहानी प्रेरणादायक है और युवाओं को एक संदेश देती है, जीवन की सबसे खराब परिस्थितियों में भी कभी उम्मीद न खोएं ’ के रूप में नाम दर्ज किया है।
गौरतलब है कि किसी सीए द्वारा अपनी सफलता की रियल स्टोरी को दर्ज करने वाली यह पहली किताब है, जिसमे एक स्टूडेंट का संघर्ष तब शुरू होता है, जब पांचवी कक्षा के बाद पढाई पूरी तरह से छूट गयी थी, इनका पूरा बचपन घर परिवार से दूर होटलो में और स्टेशनो में साफ सफाई का काम करते हुए बीता, कुछ लोगो ने शारीरिक शोषण भी किया और एक दिन जीवन को नई दिशा तब मिली जब किसी ने किताब देते हुए ये कहा कि शिक्षा में बहुत बड़ी ताकत होती है, इससे तुम सब कुछ पा सकते है, सपने पूरे कर सकते हो तथा समाज में अपनी एक अलग पहचान तथा स्थान बना सकते हो इसके बाद पांचवी तक पढ़े , मुकेश ने सीधे 10 वी का फार्म (ओपन स्कूल पत्राचार पाठ्यक्रम से म.प्र. सरकार की वर्तमान योजना “रुक जाना नहीं”) भरा 3 बार असफलता के बाद भी हार नहीं मानी , चौथी बार में सफलता मिली | और आगे की पढाई जारी रखने के लिए भी संघर्ष जारी रखा आर्थिक स्थिती ठीक नहीं होने के कारण इन्हे रात में चौकीदारी का काम इंडस्ट्रियल एरिया गोविन्दपुरा में करना पड़ता था, किन्तु शिक्षा को पकड़ कर रखा और पढाई करते रहे और प्राइवेट 12वी कॉमर्स से 1996 में पास की, सफर यही खत्म नहीं हुआ सपनो में पंख तब लगे जब मुकेश, आर.के. वेअर्स प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री मंडीडीप के ऑफिस जो मारवाड़ी रोड भोपाल में लोडिंग ऑटो ड्राईवर की जॉब के दौरान फैक्ट्री मालिक वाटूमल वासवानी जी ने कुछ पेपर, सीए मनोज खरे हमीदिया रोड स्थित ऑफिस में देने को भेजा पहली बार किसी सीए को देखा और बहुत प्रभावित हुआ की अब में भी सीए करूँगा और सर को अपना गुरु बना लिया और अपना सीए का सफर शुरू किया |

सीए के पहले ग्रुप आई.पी.पी.सी (IPPC ) में 6 बार असफलताओ का सामना किया किन्तु हार नहीं मानी और 2010 में सीए की प्रोफेशनल डिग्री को हासिल कर ही लिया और आज भोपाल में प्रैक्टिस करते है | सीए मुकेश राजपूत उन स्टूडेंट्स के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है जो जरा सी असफलता मिलने से निराश हो जाते है और सारा दोष किसमत या गरीबी को देकर छोड़ देते है या संघर्ष से डरकर आत्महत्या जैसे कदम उठाने लगते है | जब सीए से चर्चा की तो उन्होंने बताया की मेने इस एक जीवन में दो-दो जिंदगी को जिया है एक वो जो दरिद्रता वाली और दूसरी किसी सपने से काम नहीं | सीए मुकेश आगे कहते है डिअर स्टूडेंट्स यदि हम गरीब है तो हमे डरने की कोई जरुरत नहीं है हमारे पास एजुकेशन का टूल है जिसके सहारे हम अपने सभी सपनो को हकीकत में बदल सकते है, एजुकेशन कभी भी अमीरी – गरीबी में भेदभाव नहीं करती है वो सभी को सामान रूप से मिलती है हां ये हो सकता है कि यदि आप आर्थिक रूप से कमजोर हो तो कम सुविधाओं में आपको ज्यादा परिश्रम करना पड़े किन्तु असंभव कुछ भी नहीं, आप मुझे देख सकते है |

सीए पास द रियल स्टोरी – बुक लिखने की प्रेरणा

सीए मुकेश आगे कहते है कि किताब लिखने का उनका पहले से कोई प्लान नहीं था | मै वर्ष 2010 में सीए बन चुका था और काफी परिश्रम करके अपने ड्रीम को पाया तो मेरे सामने अब सिर्फ एक ही उद्देश्य था बहुत मेहनत करके अपने पेशेवर कार्य को स्थापित करना, और स्थापित भी किया, वर्ष 2012 की बात है अपने ऑफिस में क्लाइंट ओझा जी (मशाले की सप्लाई करते है ) के साथ पेशेवर कार्य के दौरान पावर कट हो गया, तो मेने अपनी जिंदगी के एक छोटे से हिस्से की कहानी सुनाई,

सीए मुकेश : ओझा सर आपका गुड्स इटारसी में श्री शरद अग्रवाल जी के यहाँ जाता है ,
ओझा जी : हाँ जाता है बताये क्या हुआ ? (आश्चर्य से)
सीए मुकेश : सर में वहा पर चौकीदारी का काम किया करता था, और मेरी ड्यूटी शाम 8 बजे से सुबह 7 बजे तक रहती थी और मेरा काम था दुकान के साथ साथ घर की निगरानी करना जो की ओल्ड बस स्टैंड इटारसी के पास था, एक रात की बात है ड्यूटी के दौरान सुबह के 5 बजे के आस-पास दो चोरो को पकड़ा जो कार से पेट्रोल निकाल रहे थे, किन्तु चोर दो थे और में अकेला तो उन्होंने मुझे ही पीटना शुरू कर दिया मेने भी संघर्ष किया किन्तु वे मुझसे बड़े और पेशेवर चोर थे, इस कारण में उनसे हारने लगा, वे लोग पीटते समय जोर जोर से कहने लगे चौकीदारी के साथ चोरी भी करते हो, भीड़ एकत्रित होनी लगी उन्होंने भीड़ को भरोसा दिलाया ये चौकीदारी के भेष में एक चोर भी है, हम यहाँ से गुजर रहे थे तो हमने इसे ऐसा करते देखा और पकड़ लिया, भीड़ ने भी अपना गुस्सा मुझ पर ही निकाला , में बहुत मिन्नतें कर रहा था कि में चोर नहीं हूँ , लेकिन भीड़ के पास सोचने समझने की ताकत नहीं होती और न समय, और इस प्रकार भीड़ मुझे मारते मारते इटारसी थाने ले गयी , थाने में भी सिपाहियों ने मेरे ऊपर हाथ साफ किया, कुछ देर बाद टी.आई. साहब आये, और पूरी घटना को उन्होंने ध्यान से सुना और मेरी और ध्यान से देखा, और भीड़ से पूछा की वो लोग कौन है जिन्होंने पहली बार इस लड़के को चोरी करते पकड़ा , पता चला वो दोनों चोर तो भीड़ से पहले से ही गायब हो चुके थे , इस प्रकार उनकी पारखी नजर ने मुझे पहचाना और मेरे पास आकर कंधे को थपथपा कर कहाँ देखना एक दिन तुम पढ़ लिखकर बहुत बड़े इंसान बनोगे और मुझे जाने को कहा ।

जब ये कहानी ओझा जी ने सुनी तो वे बहुत भावुक हो गए और उनकी आँखे डबडबा गयी, अपनी कुर्सी से उठकर मेरे पास आकर मुझसे गले मिले और कहाँ की सच में आपकी जीवन यात्रा बहुत ही प्रेरणादायक है, आपने इतनी मुसीबते झेली और इतनी असफलताएं मिली फिर भी आप निराश नहीं हुए और निरंतर परिश्रम और प्रयास से आप एक सफल व्यकित बने, में देखता हू आजकल के स्टूडेंट्स को जरा सी असफलता मिलती है तो वे निराश हो जाते है, और आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते है जबकि यदि वे भी ट्राय अगेन पर ध्यान दे तो वे भी सफल बन सकते है , आप ऐसे स्टूडेंट्स के लिए एक रोशनी का काम करोगे , इसीलिए आप अपनी इस रियल स्टोरी को एक बुक का रूप देकर स्टूडेंट्स की हेल्प करे | और इस प्रकार मेने तीन वर्ष की कड़ी मेहनत से एक किताब लिखी “सीए पास द रियल स्टोरी” और फिर उन्ही क्लाइंट ने कहा की अब आपको स्टूडेंट्स के बीच जाकर उन्हें अपनी स्टोरी सुनाकर उन्हें पढाई के लिए मोटिवेट करे , स्टूडेंट्स आपको अपने सामने पाकर प्रभावित होंगे और निसंदेह जीवन में कुछ बनने के लिए पूरे जोश के साथ दौड़ पड़ेंगे, पूरे भारत में मेंने 8 राज्यों में 62 सेमीनार देकर हजारो स्टूडेंट्स की कैरियर काउन्सलिंग करके उन्हें पढाई के लिए मोटिवेट किया और इस महान कार्य के लिए वे कोई फीस नहीं लेते है।

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