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इस अनोखी घटना के बाद राष्ट्रपति भवन का “दरबार हॉल” तालियों से गूँज उठा।

Harshit Sharma 16 March 2019 8:13 PM Articles 47953

जब “पेड़ों की माँ” ने आशीर्वाद देने के लिए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के माथे को छुआ ।

सख्त प्रोटोकॉल वाले समारोह में, राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री और सभी मेहमानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी, सभी तालियां बजाते रहे ।

जैसे ही राष्ट्रपति ने उन्हें कैमरे के तरफ देखने को कहा उन्होंने अपना हाथ आगे करते हुए राष्ट्रपति के माथे पर रखा।

107 वर्षीय शैलूमारदा थिमक्का कथित तौर पर 40 की उम्र में आत्महत्या करना चाहती थी क्योंकि वह गर्भ धारण नहीं कर सकती थी। पति की हिम्मत और सहयोग से उन्होंने पेड़ लगाना शुरू किया और 65 वर्षों की अवधि में 8,000 से अधिक पेड़ लगाए हैं

कर्नाटक में हजारों पेड़ लगाने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया ।

सख्त प्रोटोकॉल का कार्यक्रम भी 107 वर्षीय शैलुमारदा थिमक्का की मातृ प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगा सका, जब उन्होंने आशीर्वाद देने के लिए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के माथे को छू लिया था।

400 से अधिक बरगद सहित 8,000 पेड़ लगाने के लिए वृक्षा माथे (पेड़ों की माता) ’के नाम से मशहूर थिम्मक्का को शनिवार (16 मार्च) को राष्ट्रपति भवन में अन्य हस्तियों के साथ सम्मानित किया गया।

सख्त प्रोटोकॉल के समारोह में, थिम्मक्का ने हल्के हरे रंग की साड़ी पहने, मुस्कुराते हुए चेहरे और माथे पर ‘त्रिपुंड’ के साथ राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से पुरस्कार प्राप्त करने के लिए डायस पर कदम रखे।

थिम्मक्का से 33 साल छोटे राष्ट्रपति कोविंद ने जब उन्हें कैमरे का सामना करने के लिए कहा, तो थिमक्का ने उन्हें आशीर्वाद देने के लिए उनके माथे को छुआ।

उनकी मासूमियत भरी हरकत से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उन तमाम मेहमानों के चेहरे पर मुस्कान आ गई, और सभी उनके लिए तालियाँ बजाते नही थके।

 

थिमक्का की कहानी उनके धैर्य और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।

इस दंपति ने दिन दिन भर खेतों में काम किया, पेड़ लगाए और उनकी देखभाल की। पहले वर्ष में 10 पौधों से, बाद के वर्षों में वे अधिक पौधे लगाते रहे।

कभी-कभी अपने पौधों के लिए 4 किलोमीटर से अधिक पैदल चलकर पानी भी लाते थे।

कर्नाटक के हुलीकल गाँव में जन्मी , थिम्मक्का ने 65 वर्षों की अवधि में 8,000 से अधिक पेड़ लगाए हैं। 1991 में उनके पति का निधन हो गया।

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