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इस गाँव में शुरू हुआ मप्र के पहला डिजिटल मोहल्ला क्लिनिक..

Harshit Sharma 10 March 2019 7:19 PM Articles 92784

मध्यप्रदेश का पहला मोहल्ला क्लिनिक शुरू हुआ नरसिंहपुर के मेहरागांव में।

जो काम सूबे की सरकार या चुने हुए जन प्रतिनिधियों को करना चाहिए वह काम किया गांव की महिला “माया विश्वकर्मा” ने।

प्रदेश के पहले डिजिटल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की अपने गाँव से की शुुुरुआत।

दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक की तर्ज पर बनाया “सुकर्मा टेली मेडिसिन सेंटर “

 

नरसिंहपुर(मध्यप्रदेश)। दिल्ली में खुले मोहल्ला क्लिनिक के बारे में आपने जरूर सुना होगा कि कैसे केजरीवाल सरकार ने आम आदमी तक स्वास्थ सुविधा उपलब्ध करने के लिए छोटे छोटे मोहल्लों में डिस्पेन्सरी क्लिनिक की शुरआत की जिसमे तमाम इलाज और दवाएं मुफ्त मुहैया कराई जा रही है। इसी से प्रभावित होकर मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गाँव मेहरागांव की निवासी माया विश्वकर्मा में शुरुआत की है इसी तरह के डिजिटल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की।

सुकर्मा फॉउंडेशन के बैनर तले यह टेली मेडिसिन सेंटर अपने आप मे खास तरह का प्राथमिक डिजिटल उपचार केंद्र है जो पूरी तरह इंटरनेट के मध्यम से संचालित होगा ।इसमे मरीज सभी रोगों से सम्बधित बीमारी का लाइव स्क्रीन पर टेली मोनिटरिंग के जरिये देश विदेश के विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे परामर्श ले सकेंगे।इस डिजिटल केंद्र में स्क्रीन से लगी एक दवाई की मशीन है जिसे ऑटो मेडिसिन वेंडिंग मशीन कहा जाता है, डॉक्टर के परामर्श से जो डिजिटल पर्ची मरीज को मिलेगी उस इस वेंडिंग मशीन पर लगाते ही जरूरत की दवाई निकल आएगी । इस तरह की यह प्रदेश का पहला डिजिटल स्वस्थ केंद्र होगा।

माया विश्वकर्मा ..नाम याद है ना?

पढ़ाई के लिए गाँव से अमरीका तक किया सफर

नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा विधानसभा का छोटा सा गांव “मेहरागांव” से निकली माया ने अपनी स्कूली पढ़ाई गांव में की इसके बाद 12 वी गाडरवारा में और जबलपुर के रानी दुर्गावती विवि से स्नातक करने के बाद अमरीका के साउथ डोकोटा में कैंसर एंड हेल्थ पर रिसर्च भी की।
विदेश में रहकर देश मे कुछ बेहतर करने की भावना तो सभी के मन मे होती परंतु इसे हकीकत में ढालना माया जैसी दृढ़ संकल्पित महिला ही कर सकती है।

2011 में दिल्ली में हुए अन्ना आंदोलन ने लाखों अप्रवासी भारतीयों को अपनी तरफ खींचा उन्ही में एक माया विश्वकर्मा थी।

गाँव पर आधारित फ़िल्म भी बना चुकी है माया

जिस परिवर्तन की आस लिए वो गांव लौटी थी उस पर काम शुरू कर दिया।
जिसकी शुरुआत क्षेत्र भ्रमण से हुई इसमे उन्हें बघुवार गांव की जानकारी लगी । बघुवार पूर्णतः स्वराज पर आधारित ग्राम पंचायत है जिसे राष्ट्रपति पुरुष्कार भी प्राप्त है। माया ने इस गाँव की उपलब्धि को अपनी किताब और फ़िल्म “स्वराज मुमकिम है” के नाम से दुनिया भर प्रसिद्धि दिलाई और अनेकों पुरुष्कार भी जीते।

माया विश्वकर्मा से बनी “पैड वीमेन” ऑफ इंडिया

अगली कड़ी में माया ने नरसिंहपुर में हुए “बच्चा दानी कांड” के बारे में अखबारों में पढ़ा इससे इससे प्रभावित हुई माया ने नरसिंहपुर में सुकर्मा फॉउंडेशन की स्थापना कर सैनिटरी पैड फैक्ट्री स्थापित की ताकि महिलाओं को सस्ते पैड उलब्ध हो सके, इसके लिए माया ने प्रदेश भर के 22 आदिवासी जिलो में जागरुकता यात्रा निकाली जिसमे आदिवासी महिलाओं और छात्राओं को माहवारी में गीला कपड़ा इस्तेमाल करने से होने वाली बीमारी के प्रति जागरूक किया और पैड इस्तेमाल करने की सलाह दी साथ ही निःशुल्क पैड उपलब्ध कराए।


इसका इतना प्रभाव रहा कि माया विश्वकर्मा आज पूरे देश मे “पैड वीमेन ” नाम से पहचानी जाती है। उनके इस काम के लिए देश विदेश के कई संस्थानो ने उन्हें उद्बोधन के लिए आमंत्रित कर सम्मानित किया।
केरल बाढ़ प्रभावितो की मदद में भी पीछे नही रही माया ने प्राकृतिक आपदा से ग्रसित केरल में बड़ी मात्रा में सैनिट्री पैड,और अन्य आवश्यक वस्तुऐ भी पहुँचाई।

माया का कहना है :- मेरा मानना है कि एक स्वस्थ एवं शिक्षित महिला ही सशक्त महिला बन सकती है , और एक सशक्त महिला स्वरोजगार के साधन जुटा सकती है उससे ही सशक्त समाज बन सकता है। इसलिए मेरा ध्यान अपने समाज की महिलाओं और बच्चों को स्वस्थ और शिक्षित करने पर है।आज जहाँ प्राइवेट क्लिनिक में डॉक्टर हाथ लगाने भर के 200 रुपये ले लेते है ऐसे में इस डिजिटल स्वास्थ्य केंद्र पर न्यूनतम खर्च में प्राथमिक इलाज मिल सके यही मेरा मकसद है। आने वाले समय मे यहाँ कई तरह के टेस्ट सुविधा भी उपलब्ध होगी जिससे आसपास के हजारों ग्रामीणों को नरसिंहपुर नही जाना पड़ेगा।

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