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RSS का ईसाई धर्म के प्रति नजरिया

Sandeep Singh 18 September 2019 1:06 PM Articles 18639

संघ परिवार के अनुसार ईसाइयत ‘एक नकली धर्म’ है तथा ईसा आक्रमणकारियों के द्वारा द्वारा कृतिम रूप से बनाये गए हैं, ‘व्यर्थ की चीज है’। भारत के सभी जिम्मेदार नागरिकों को इसके संबंध में थोड़ा बहुत जानना चाहिए। ईसाइयत के अनुयायिओं के ऐसे दुःस्वप्न 1997-98 से देखने को मिल रहें हैं।
जबसे भाजपा ने गुजरात और फिर केन्द्र में अपनी सरकार बनाई थी। भारत के तत्कालीन गृहराज्य मंत्री ने 28 अगस्त 2001 को लोकसभा को सूचित किया कि 1999 से लेकर अब तक ईसाइयों पर 417 हमलें हो चुके हैं, जिनमें 33 व्यक्ति मारें जा चुके हैं और 283 व्यक्ति घायल हो चुके हैं।

यह याद रखना जरूरी है कि स्वतंत्रता के प्रथम 50 वर्षों में ईसाई समुदाय पर मात्र 35 मामूली किस्म की घटनाएं हुई थीं।

लोकसभा में उस मंत्री का बयान दिए जाने के बाद हमलें और बढ़ गए और यह देश के प्रत्येक भाग में घटित होने लग गये थे। भारत में ईसाई धर्म के इतिहास में पहली बार कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गोवा के चर्चों में बम रखे गए, कब्रिस्तानों से शव उखाड़कर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल द्वारा चर्चों के समक्ष रख दिये गए।

स्कूलों, प्रिंसिपलों, शिक्षकों, पुजारी, धार्मिक जनों, सन्यासियों एवं मिशनरियों पर देश भर में हमले हुए किये गए। हत्यायें की गई, अपंग बनाया गया। और यहाँ तक की उन्हें सार्वजनिक सड़कों पर निर्वस्त्र घुमाया गया, बाइबिल की प्रतियों को फाड़ा गया, जलाया गया और गलियों में बिखेर दिया गया।

कुछ इस तरह से ईसाई और ईसायत के प्रति संघ परिवार का हिंसात्मक और घृणायुक्त नजरिया रहा है। अगर कोई भी इंसान किसी भी धर्म का सच्चा अनुयायी होगा तो इस तरह के संगठन की परछाईं से भी दूर रहेगा।

साभार: धर्म, सत्ता और हिंसा, पृष्ठ संख्या 251

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